
Tara Shukla
वेदांत दर्शन के अनुसार मनुष्य एक विशुद्ध चेतना है जो शारीरिक सीमा में आबद्ध है और यही उसकी छटपटाहट है । स्त्री या पुरुष की कायिक संरचना में बहुत अल्प मूलभूत अंतर है परन्तु बचपन से ही परिवार और समाज द्वारा यह रोल मॉडल ट्रेनिंग दी जाती है कि यह लड़की है और वह लड़का है। आगे चलकर यही विभाजन स्त्री तथा पुरुष के स्वभाव रूप में जाना जाता है। इसी लिए लेखिका सिमोन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ( द सेकंड सेक्स ) में यह…















