
Brahma kumari Rao
भोलेपन और सादगी में जीवन गुजार दूं ना कुछ कामना रखूं ना किसी का दिल दुखाउ। किसी से कुछ लेने की नीयत ना रखूं, जितना हो सके दूसरों का भला करूं।🌝 👆👆 पर यहां अहंकार बच गया मिटने से। मीठे भ्रम में सब कुछ अच्छा अच्छा करती हूं। ये तो देखा ही नहीं अहंकार अच्छाई में ही फल फूल रहा है।👻 आत्मावलोकन भी करना होता है और अच्छे की परिभाषा क्या है? उस पर भी ध्यान देना होता है।जो स्वयं मुक्त नहीं वह भला दूसरों को भीक्या ही दे देगी। आत्मज्ञान से ही सच्चाई और अच्छा…















