
Talking Mirror
कविता जी, बेटी को बहुत बधाई, ब्रॉन्ज मेडल और वो भी इतनी दूर अकेले जाकर, ये उसकी हिम्मत है। और आपकी हिम्मत भी कम नहीं, डर को पकड़े रहने के बजाय उसे पहचान कर छोड़ देना, ये आसान नहीं होता किसी माँ के लिए। बेटी ने मैदान जीता, आपने अपने भीतर का एक मोर्चा जीता।
















