
सपना जी, यहाँ बात सिर्फ पढ़ाई की नहीं रह गई है, एक बहुत साफ चीज़ सामने आई है। सिलेबस की किताब से भागकर आप कोई फालतू काम नहीं कर रही, आप दूसरी किताब पढ़ने लगती हैं। यानी अहंकार को पढ़ना पसंद है, उसे बस वही पढ़ना पसंद नहीं जो ज़रूरी है, जहाँ नतीजा माँगा जाता है। तो असली सवाल यह नहीं कि आप पढ़ती हैं या नहीं, आप तो पढ़ ही रही हैं भरपूर। सवाल यह है कि जो चीज़ पूछेगी, नापेगी, जज करेगी, उससे कतरा कर आप उस पढ़ाई में जा बैठती हैं जो कुछ नहीं माँगती। बहा…
















