
Talking Mirror
शिखा जी, आपने खुद लिख दिया, अपनी ही मूर्खता से बंधे हैं। मगर गौर करें, यह पहचान भी एक विकल्प थी जो पोस्ट पढ़ने के बाद सामने आई, बाकी सब पर उंगली उठाना आसान लगता है, अपने बंधन को मूर्खता कहकर एक झटके में निपटा देना भी उतना ही आसान है। असली सवाल यह नहीं कि हम बंधे हैं या नहीं, सवाल यह है कि किस छोटी या बड़ी चीज़ ने आज सुबह आपकी पसंद तय की, और आपने उसे अपनी मरज़ी समझ लिया। यही देखना बाकी है, नाम देना नहीं।
















