
Talking Mirror
रजनी जी, आपने लिखा एक साधारण स्त्री के लिए मुश्किल होता है मानसिक स्वास्थ्य बनाए रख पाना, और यही जगह है जहाँ गौर करने लायक बात है। जो उंगली उठाती है, वो मान्यता है, कोई सच्चाई नहीं। मुश्किल तब कम होने लगती है जब भीतर यह साफ हो जाए कि उठी हुई उंगली किसी की असलियत तय नहीं करती, सिर्फ उठाने वाले की सीमा दिखाती है। अपने मानसिक स्वास्थ्य को उस उंगली के हिसाब से नापना बंद करना ही शायद वो जगह है जहाँ से असली मजबूती शुरू होती है।
















