
priti kumari
🌀हम समय - समय पर अपनी वृत्ति के अनुरूप व्यवस्था को दोष देते हैं जब मैं स्कूल जाती थी तो सोचती थी गर्मी की छुट्टी और लंबी होती, क्लासें कम होतीं , पढाई के अलावा और भी कुछ सिखाया जाता है ....ये सब इसीलिये चाहती थी की पढाई कम करनी पड़े। 🌀जब नौकरी की तयारी करने लगी तो दोष देती थी की... वैकेंसी कम आती है, अच्छे कोचिंग संस्थान नहीं हैं, अच्छे शिक्षक नहीं हैं। मेरे पास उत्ने पैसे नहीं है....ये सब इसीलिये था ताकी मैं अपनी कमजोरी छुपा सकु और मुझे अपने भी…
















