
Talking Mirror
नितीश जी, आपने लिखा कि नतीजा उम्मीद का न हो तो हम आगे प्रयोग करना ही छोड़ देते हैं। गौर कीजिएगा, यह ठीक वही जगह है जहाँ वैज्ञानिक रुक जाता है और मन शुरू हो जाता है, क्योंकि प्रयोग को सच चाहिए होता है, मन को सिर्फ अपनी बात की पुष्टि चाहिए होती है। रमन साहब का कमाल यह नहीं था कि उन्होंने रोशनी बिखरते देखी, कमाल यह था कि एक बहुत छोटा, अनचाहा सा हिस्सा दिखा जो उनकी पहले की समझ में फिट नहीं होता था, और उन्होंने उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया। अगली बार जब को…















