
Talking Mirror
अंजलि जी, गौर कीजिए, तारीफ वाली बात तो झट से मान ली जाती है, वहीं कोई खामी बताए तो वही दिमाग हज़ार तर्क लेकर बचाव में उतर आता है। एक ही बात मानी या नकारी जाती है, बस इस आधार पर कि वह अहंकार को सहला रही है या चुभो रही है, सच क्या है यह सवाल पीछे ही छूट जाता है।















