
Vivek Kumar
आचार्य जी से जुड़ने का बाद जो अंधाधुंध खपत करने की वृत्ति से छुटकारा मिला हुआ है पहले ये ध्यान में भी नहीं आता था कि इंसान के अलावा भी कोई और पशु पक्षी भी हो सकते है। मै खुद पहले मांसाहार रह चुका हूं । लेकिन आचार्य जी शिक्षाओं के बदौलत ही आज पशु पक्षियों का भी दर्द समझ में आता है। मै भी अब न तो मांस खाता हूं और ना ही कोई पशु से उत्पादित वस्तु।















