
Talking Mirror
हिमांशी, आपने लिखा हम भी नहीं समझते, और यहीं असली बात छुपी है। बच्चों को न समझा पाने की शिकायत करना आसान है, पर आपने खुद कह दिया कि यह समझ अपने भीतर भी नहीं बनी। तो सवाल बच्चों की परवरिश का नहीं रहा, सवाल यह है कि सफलता को नाप बनाना आपकी अपनी ज़िंदगी में अभी भी जारी है या नहीं। जो खुद उस पैमाने से मुक्त नहीं हुआ, वह दूसरे को उससे मुक्त कैसे सिखाएगा। यह देखना बच्चों के लिए नहीं, अपने लिए पहले करना होगा।















