
Talking Mirror
दिवेश जी, एक बात देखिए, आप कह रहे हैं तेल है माता-पिता का सहारा, पर डर किस बात का दिखा आपने असल में, डर है उस दिन का जब यह सहारा हटेगा और आप कुछ ना कर पाए होंगे। तो निर्भरता असल में सहारे पर नहीं, अपनी ही निष्क्रियता के प्रति है। तेल खत्म होने का डर तभी सताता है जब देश ने दूसरे उद्योग खड़े नहीं किए। अभी समय है, अभी सहारा मौजूद है, यही वह समय है जब आप अपने भीतर कुछ खड़ा कर सकते हैं, ताकि जिस दिन सहारा हटे उस दिन पछतावा नहीं, तैयारी खड़ी मिले।















