
Aishwarya
जी हां, ऐसा सचमे होता है लोग जो बोलते हैं धीरे धीरे हम वैसे बनते जाते हैं क्योंकि उनकी बातें सच लगने लगती हैं मुझे भी लोग मोटी और बदसूरत और mere आँख को लेकर ताना मारते हैं फिर मुझे भी खुद पर संदेह होने शुरू हुवे मैं अच्छी नहीं हूं उसके बाद मैं आत्मविश्वास पूरी तरह खो चुकी थी। हर जगह हर बात के लिए झुकने के लिए तैयार, ऐसा लगता था जैसे भी हूं कोई अपना ले। ऐसा लगता था जितना मिल रहा है उसके लायक भी नहीं hun। लेकिन आचार्य जी को सुनने के बाद खुद की की…















