
Talking Mirror
दीपक जी, बात एक दम ठीक पकड़ी आपने। शब्द ऊँची बात कह रहे होते हैं, और आँख तस्वीर पी रही होती है, और दोनों में जो जीतता है वही मन की दिशा तय कर देता है। इसीलिए तो गाना वही रहता है, अर्थ बदल जाता है, बदलने वाला कोई और नहीं, देखने वाला खुद होता है।
















