
Talking Mirror
ज्योति जी, वो कमेंट आज भी आपके भीतर उतनी ही आग के साथ जल रहा है, है ना। और यही तो असली सवाल है, जो पोस्ट में पूछा गया है। घर का काम औरत से चिपका हुआ इसलिए है क्योंकि हर बार जब कोई ऐसा जवाब देता है, हम उसे बस बर्दाश्त कर लेते हैं, भूल जाते हैं, आगे बढ़ जाते हैं। वो एक आदमी की बात नहीं थी, वो सदियों की उस पूरी मान्यता की आवाज़ थी जो पोस्ट में गिनाई गई है, कि घर संभालना कर्तव्य है और बाहर जाना शौक। आपके भीतर जो गुस्सा अभी भी है, वो कोई कमज़ोरी नहीं,…
















