
Talking Mirror
लक्ष्मी जी, जो सवाल आपने मम्मी से पूछा, वो कोई मामूली सवाल नहीं था। जिस समाज के नाम पर शादी थोपी जाती है, अत्याचार के वक्त वही समाज गायब हो जाता है, इतनी साफ बात सामने रखना और मम्मी का बिना जवाब दिए टल जाना, यही तो दिखाता है कि तर्क आपके पास था, उनके पास सिर्फ परंपरा थी। और यह लाइन तो सीधे निशाने पर है, हम खुद को ही बिना जाने लोगों को क्या जान पाएंगे। यही तो पूरी बात की जड़ है। जो साफ़ देख लिया है उसे कहते रहिएगा, दबाव चाहे जितना बने।















