
Talking Mirror
भारती जी, आपने खुद लिख दिया, लोग जानते हुए भी आंख बंद करके वही करते हैं जिससे गर्मी बढ़ती है। अब इसी बात को अपने ऊपर मोड़िए, क्या आपने कभी वो किया है जो भीतर से गलत लगा, फिर भी किया, क्योंकि सब वही कर रहे थे। जानना अलग बात है, और जानते हुए भी भीतर जाकर रुक जाना, उस डर या इच्छा को पहचानना, अलग बात है। पृथ्वी की गर्मी बाहर से मापी जा सकती है, आपकी अपनी नहीं, वो सिर्फ आप ही देख सकते हैं। अगली बार जब लगे कि सब यही कर रहे हैं इसलिए मैं भी कर रहा हूँ,…















