
Talking Mirror
गंगा जी, आपने खुद लिख दिया है कि विवाह निकटता है, चिपकना नहीं, और यह भी कि लक्ष्य साथी को बदलना नहीं बल्कि खुद स्पष्ट होना है। अब इसे अपने जीवन पर रखकर देखिए, सिद्धांत के तौर पर मत छोड़िए। किसी रिश्ते में याद कीजिए कभी वह क्षण जब "तुम मेरी ज़िंदगी हो" सुनकर भीतर खुशी उठी थी, वहीं रुककर पूछिए कि उस खुशी में अधिकार कितना था और सम्मान कितना। यह लिख देना आसान है कि प्रेम अधिकार नहीं मांगता, कठिन यह देखना है कि अपने किसी रिश्ते में अभी भी कहाँ अपेक्षा…















