
Priti Maurya
कुछ दवाब तो कुछ मजबूरी के नाम से ये सब चलता रहता है कुछ बोलने पर घर की महिलाएं ही विरोध करती है मेरी बहन ने अपने आठ साल के रिश्ते को तोड़ा आज भी उसको विरोध का सामना करना पड़ता हैं लेकिन अब वो बिना भय डर के अपने फैसले लेती है और खुश है तब सिर्फ मैंने उसका साथ दिया था और ये सिर्फ आचार्य जी की शिक्षा की वजह से हो पाया था




























