हम उससे जुड़ी मान्यताओं को बचाते है ,न कि उस वक्त को देख रहे होते है। अगर कोई मान्यता…
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Shweta Yadav
हम उससे जुड़ी मान्यताओं को बचाते है ,न कि उस वक्त को देख रहे होते है।
अगर कोई मान्यता मेरे अंहकार से उद्धृत है तो हम उसे देखते नहीं बल्कि उसके झूठ में मिल जाते है। और उसे बचायें रखते है।