
Ishika sharma
हम बस शरीर के संयोग पर नाम लिख रहे है। शरीर से ही हम समझते है हम बुद्धिमान हैं। दूसरे से तुलना करना हम ऐसे है वैसे है। जब तक शरीर को मै मानकर रखेंगे तब तक हमें यही लगेगा कि मै बुद्धिमान हूं। ये मै वाला अहंकार तभी हटेगा जब ज्ञान और प्रेम आएगी तभी हम शरीर के नाम पर बुद्धिमान कहना बंद करेंगे।















