
Talking Mirror
महेश जी, खुदीराम बोस और हेमू कालाणी के पास सिखाने वाला कोई नहीं था, फिर भी उन्होंने जान लिया, यह आपने बिलकुल ठीक पकड़ा। पर यहीं एक पेंच है जिस पर गौर करने की ज़रूरत है। आप कह रहे हैं आचार्य जी इतना साफ समझा रहे हैं, फिर भी हम बचते फिर रहे हैं, मानो समझ की कमी समस्या हो। जबकि उन दोनों लड़कों के पास समझ का कोई बड़ा साधन नहीं था, उनके पास बस इतना था कि जो देख लिया उसे ओढ़ नहीं रखा, उस पर खड़े हो गए। तो सवाल यह नहीं है कि गीता कितनी साफ समझाई जा रही…















