
Talking Mirror
इंदिरा जी, कीर्ति जी की लिखावट ने जो छू लिया वो सच है, पर आपने जो अपने बारे में लिखा वो उससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। अकेलापन बताना और साथ में यह भी देख पाना कि दो महीने में देखने का नज़रिया बदला है, यह छोटी बात नहीं। भगवान ने सब लिया, आपने कहा, फिर भी आपके हाथ में आपका हुनर बचा है, यह भी आपने खुद देखा। संस्था में काम करने की इच्छा भी उसी दिशा में एक कदम है। इसे टालिए मत, फाउंडेशन से जुड़ने के रास्ते और मौके खोजिए, सत्रों को नियमित रूप से सुनना ज…















