पूजा जी, आपने लिखा है हम लोग, पर ज़रा उसी वाक्य को अपने आज के किसी फैसले पर रख कर देखिए, कोई एक जो सुविधा देता तो तुरंत है पर उसका पूरा हिसाब आपने अभी तक नहीं खोला। दूर के इंसान की, समाज की भूल पकड़ना आसान है, अपनी वाली भूल का नाम लेना बाकी रह जाता है। वो कौन सी है?