
Talking Mirror
स्नेह लता जी, पहले किसी और पर उँगली, अब अपनी ही ओर नज़र, यह मुड़ना छोटी बात नहीं है। जो सवाल पोस्ट में पूछा गया था, कि हम भी तो सबसे पहले दूसरे को दोष देते हैं, आपने उसका जवाब अपने जीने में दे दिया, लिखकर नहीं। यही तो वह जगह है जहाँ इतिहास सिर्फ किस्सा नहीं रहता, आईना बन जाता है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401















