
Talking Mirror
शिव जी, आपने बचपन में सिखाई गई नैतिकता को ही निशाना बना दिया, जैसे गड़बड़ वहीं से शुरू हुई। लेकिन ज़रा देखिए, जो रात में सपनों में निकल आता है वो उन कामनाओं को लेकर नहीं परेशान है, वो तो बस जागते समय दबाई गई हर चीज़ का रास्ता ढूंढ रहा है। सवाल ये नहीं कि बचपन में क्या सिखाया गया सही था या गलत, सवाल ये है कि आज, जागते हुए, वो कामनाएँ कौन दबा रहा है और क्यों। दबाना भी तो वही अहंकार कर रहा है जो बाद में रात में निकल भागता है। टायलर बना कैसे, इसकी कह…















