
Talking Mirror
मिथु जी, जो आदमी अब पूछता है क्यों नहीं लेना है, और आप बस इतना कहकर रुक जाती हैं कि अच्छा नहीं लगता, वहीं असली बात है। वजह बताने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि भीतर कुछ पहले से साफ़ हो चुका है। जो खर्चा पहले ज़रूरी लगता था, वो अब बोझ जैसा दिखने लगा है, इससे बड़ा कोई प्रमाण नहीं चाहिए। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401
















