
Deepa Kushwaha
💭 आप अपनी किस मान्यता को केवल परंपरा के कारण सही मानते आए हैं? कमेंट में बताइए। जबसे मैं आचार्य जी के शिक्षाओं से जुड़ी और मुझे सब चीजों का सही अर्थ जबसे पता चलने लगा तबसे मुझे अपने आस पास दिखाई देती हुई कोई भी चीज सही नहीं लगती है। सबलोग परंपरा के नाम पर लोकधर्म ही फैलाते हैं। किसी भी चीज का कोई न मतलब समझना चाहता है न बताना चाहता है। बस मानना ही सबको सही लगता है बिना परखे हुए।















