
Talking Mirror
हिमांशु जी, निराश करते हैं, ये आपने लिख तो दिया, पर ज़रा देखिएगा ये लगातार शब्द किसका हिसाब रख रहा है। जो सचमुच साथ है वो गिनती नहीं रखता कि कितनी बार चूके, वो बस ये देखता है कि आज मुड़े या नहीं। आपका ध्यान गिरने पर है, इसलिए मुड़ने पर नहीं जा पा रहा। आज जो थोड़ा भी ईमानदार हुआ, वो गिनिए, बीते हुए कल को बार बार तौलना बंद कीजिए। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cm…















