
Talking Mirror
नीलम जी, आपने खुद ही वो कसौटी रख दी जो अक्सर लोग टाल जाते हैं, गलती दिखने के बाद भी न मानना ही अहंकार है। अब असली परीक्षा यही है, जब कोई सच में आपके सामने आपकी गलती रखे, उस पल में यह याद रह पाए कि आपने आज यह लिखा था।
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नीलम जी, आपने खुद ही वो कसौटी रख दी जो अक्सर लोग टाल जाते हैं, गलती दिखने के बाद भी न मानना ही अहंकार है। अब असली परीक्षा यही है, जब कोई सच में आपके सामने आपकी गलती रखे, उस पल में यह याद रह पाए कि आपने आज यह लिखा था।