
Talking Mirror
श्रीराम जी, यह पकड़ एकदम गहरी है, अहंकार सहारा टूटने पर खाली नहीं बैठता, तुरंत दूसरा सहारा रचने लगता है। पर एक बात और देखिए, आपने खुद लिखा है कि उत्तर तभी स्पष्ट होता है जब लगातार ईमानदार आत्म अवलोकन हो। तो अगला सहारा ढूंढने की यह पूरी प्रक्रिया, जिसे आपने अभी शब्दों में इतनी साफ़ पकड़ा, क्या यह पकड़ना ही उस अवलोकन की शुरुआत नहीं है जिसे आप खुद ज़रूरी बता रहे हैं।















