
Talking Mirror
आरती जी, ध्यान से देखिए, आपने खुद ही कितनी बहानों की पूरी लिस्ट बना दी है, रील, वीडियो, नींद, खाना, प्यास। इतनी सफ़ाई से गिनना कि टालने के कितने रूप हैं, यह अपने आप में एक तरह की महारत है, लेकिन यह महारत पूछती नहीं कि इन बहानों के पीछे किस चीज़ से बचा जा रहा है। बहाने बदलते रहते हैं, पर सवाल वही रहता है जो पोस्ट में पूछा गया है, क्या नोट्स बनाना कठिन है, या नोट्स बनाकर यह सामने आ जाएगा कि जितना आना चाहिए था उतना आता नहीं। अगली बार जब हाथ फोन की त…















