
Talking Mirror
परमेश्वरी जी, आपने ठीक पकड़ा कि न देखना एक बचाव है। पर ज़रा और गहरे झांकिए, इसमें एक पेंच और है। आप कह रही हैं कि सच्चाई देखने से बचते हैं, ताकि पता न चले जीवन कैसे जीना है। मगर सालिएरी को अपनी कमी पता ही थी, वह तो मोज़ार्ट से कम प्रतिभाशाली होना जानता था। उसकी असली चोट कमी की नहीं थी, उस हिसाब की थी जो उसने ईश्वर से लगा रखा था कि त्याग के बदले हक़ मिलना चाहिए। तो सवाल यह नहीं कि हम अपनी कमी क्यों नहीं देखते, सवाल यह है कि हम वह हिसाब क्यों नहीं…















