
Deepak Raj
1. AP फ्रेमवर्क चेतना को कैसे परिभाषित करता है? अपने शब्दों में लिखिए। ✍🏻 चेतना हमेशा द्वैत में होती है। एक तरफ ‘मैं’ यानी अहंकार होता है और दूसरी तरफ उसका विषय। अहंकार और उसका विषय—इन्हीं दोनों के बीच चेतना की गतिविधि होती है। इसलिए ‘विशुद्ध चेतना’ जैसी कोई अलग अवस्था, जिसमें न देखने वाला हो और न कोई विषय, मानना सही नहीं है। द्वैत के दोनों छोर पर अहंकार की ही गतिविधि हैं। जब अहंकार का विगलन होता है, तो अहंकार जिस तरह की चेतना को जानता था, वह भ…















