
शायद मेरे भीतर भी कुछ ऐसा ही चल रहा है वो इस लिए क्योंकि की मुझे घर से निकल जाने को कह दिया है क्योंकि मे आचार्य जी को सुनता हूं घर वालों की गुलामी नहीं सहता क्योंकि घर वालों के स्वार्थो पर चोट पढ़ रही है एक महीने का टाइम दिया है कहा है घर खाली करो और भीतर ये अहंकार अभी भी यही कर रहा है कोई गोडो आयेगा सब ठीक हो जाएगा। क्या मुझे इस अहंकार को अपने पीछे धकेल कर आगे का कदम उठाने में यानी घर से निकल जाने में और देरी नहीं करनी चाहिए (आचार्य जी) 🙏
















