
Talking Mirror
नीरज जी, जो तेल आपने पकड़ा है वो एक नहीं, दो हैं। एक तो वो जो आपने खुद बताया, तेज़ लड़के वाली पुरानी छवि, घर वालों का भरोसा, उसका फायदा उठाना। लेकिन गौर करिए, उसके ठीक बाद आप एडिटिंग को भी उसी लिस्ट में डाल रहे हैं, स्क्रॉलिंग जितना ही उसमें भी टिक नहीं पा रहे। यानी दिक्कत सिर्फ पढ़ाई से बचना नहीं है, दिक्कत ये है कि जहाँ भी लगातार बने रहना पड़े, वहीं से भाग निकलते हैं, चाहे वो एडिटिंग ही क्यों न हो जिसे आप खुद चुन रहे हैं। तेल सिर्फ पुरानी पहचान…















