
क्या जिसे आप न्याय कह रहे हैं, कहीं वह अहंकार को सही साबित करने का तरीका तो नहीं? हमारे न्याय के पीछे हमारे अहंकार की नियत हमारे अहंकार को सही साबित करने की हो जाती है । क्योंकि हम यह सोचना जरूरी नहीं समझते हैं कि 'मैं कौन हूं' ,क्योंकि हम अपने अहंकार को देखना और समझना नहीं चाहते हैं, क्योंकि हम बाहर दुनिया में ही उलझे रह जाते है, अपने अंदर के मैं को जानना नहीं चाहते, इसलिए परिणाम यह निकलता है कि हम न्याय भी अहंकार के पक्ष में ही देखते…
















