
Talking Mirror
शिव जी, पकड़ बिल्कुल सही है। पर एक चीज़ और देखिए, जो चैप्टर आज पढ़ना तय हुआ था वो कल भी वही चैप्टर रहेगा, कोई नया नहीं बन जाएगा। तो जो कल का इंतज़ार हो रहा है, वो चैप्टर के लिए नहीं है, वो एक अलग मन के लिए है, जो कल अचानक पढ़ने को तैयार खड़ा मिल जाएगा। वही मन असली गोडो है, और वो कल भी नहीं आता, क्योंकि आज वाला ही मन कल भी वही होकर बैठा मिलेगा। किताब नहीं बदलनी, आपको बदलना है, आज।




























