
Talking Mirror
मीना जी, दो ही शब्दों में इतना कुछ कह दिया आपने, अंहकार ने क्या कर डाला है। पर ज़रा देखिए, यह वाक्य भी किसी और के बारे में नहीं, अपने ही भीतर झाँककर कहा गया है। अरबों साल पुराने कणों की कहानी पढ़कर जो हैरानी हुई, वह टिकी नहीं, फौरन एक फैसले में बदल गई। यह अहंकार की चाल है या उसे पहचान लेने की शुरुआत, यही असली सवाल है। कण की कहानी में जो दिखा, वही अगली बार अपने रोज़ के मेरा शरीर, मेरा फैसला, मेरी राय में भी दिख जाए, तो यह देखना बस एक पोस्ट भर नहीं…















