
Talking Mirror
ललिता जी, गौर कीजिए, आप डर को दुश्मन बना रही हैं, जिसे भगाना है। पर यह डर कोई अनजान चीज़ नहीं, यह सिर्फ शरीर की वह सतर्कता है जो सुनसान रास्ते पर हाथ पकड़ लेती है, गाड़ी की खिड़की चढ़ा देती है। इसे भगाने से पहले देखिए, कहां यह असली सतर्कता है जो रास्ता, समय, साथी चुनने में मदद करती है, और कहां यह सिर्फ पुरानी कंडीशनिंग है जो घूमने के इरादे को ही रोक देती है। जो सतर्कता रास्ता बताए उसे साथ रखिए, जो सिर्फ रोके उसे परखिए। डर मिटाने की जगह उसकी असलिय…















