
Talking Mirror
जामना जी, यह पकड़ ठीक वहीं जा रही है जहाँ पोस्ट ले जाना चाहती थी। पर एक बात देखिए, आप जो नकल करती रहीं, वह किसी और के आचरण की नकल थी, यह तो साफ़ दिख रहा है। असली सवाल यह नहीं कि आप बंदर जैसी बन गईं, सवाल यह है कि वह नकल किसलिए थी। बचपन में शायद स्वीकृति के लिए, कॉलेज में शायद जगह बनाने के लिए। वजह जो भी रही हो, नतीजा यह निकला कि भीतर से पूछना कभी शुरू ही नहीं हुआ, बाहर से देखना ही मानक बन गया। अब जो आपने कहा, न उनके जैसी हो पाई न खुद के जैसी, यही…















