
Rekha
कई बार हम दूसरों को सलाह इसलिए नहीं देते कि उनकी मदद हो, बल्कि इसलिए देते हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि वे हमारी बात मानें। जब कोई हमारी सलाह नहीं मानता, तो हमें उसकी चिंता से ज्यादा अपनी बात न माने जाने का दुख होता है। यही अहंकार है। असली सवाल है: “मैं सलाह क्यों दे रहा हूँ—सामने वाले की मदद के लिए या खुद को सही साबित करने के लिए?” सच्ची मदद वही है जिसमें हम अपनी बात कहें, लेकिन सामने वाले पर अपनी बात थोपें नहीं।















