
Preeti Pancholi
मैं जब से गोवा हो कर आई हूँ तब से एक दिन भी ऐसा नहीं गया कि मैं भूल गई उन आज़ाद दिनों को और जो पल मैंने वहाँ जिये वो ज़िंदगी के बेहद ख़ूबसूरत और अनमोल थे । वैसे तो मैं पहली बार ही गई थी गोवा पर सुना बहुत था कि वहाँ तो लोग मौजमस्ती के लिए जाते है वो भी कोई आध्यात्मिक जगह है लेकिन जब आचार्य जी से मिले गीता सत्रों का साथ हो तो हर हवा , ध्वनि, समुद्र की लहरो में सिर्फ अध्यात्म की खुशबू होगी। मैंने वहीं जाकर देखा की कैसे अहंकार किसी भी जगह को अपने अन…















