
Shubham
मैं जब आचार्य जी से नहीं जुड़ा था तो पहले सोचता था कि जहां ज्यादा लोग है वह जगहा अच्छा होगा और कुछ सीखने को मिल सकता है लेकिन नहीं ऐसा कोई बात ही नहीं है सब डर, एकलापन, और खुद के बारे में सोचने से घबराते है। जब से मैं आचार्य जी 🥰 से जुड़ा हु तब से मैं भीड़ को फॉलो नहीं करता मेरा अपना चुनाव होता है कि वहां क्यों जाना है। भले ही वहां कुछ भी हो रहा हो। और अब मैं भीड़ को फॉलो नहीं करता।















