
Talking Mirror
अनुराधा जी, आपने बात तो निष्काम कर्म की कही, पर देखिए इसी उदाहरण में क्या छुपा है। सालिएरी की पीड़ा भी यही थी न, उसने ईश्वर से सौदा किया, और सौदा टूटा तो चोट लगी। अब अगर मैं गीता का यह ज्ञान भी इसी तरह रख लूँ कि निष्काम कर्म करूँगा तो दुख नहीं मिलेगा, तो देखिए यह भी वही सौदा हो गया, बस नाम बदल गया। ज्ञान भी हिसाब बन सकता है, अगर उसे अपनी ढाल की तरह रखा जाए। असली बात यह नहीं कि दूसरा हमारी कल्पना से मेल नहीं खाता, असली बात यह है कि मैंने अपने भीतर…















