
Braj mohan
यह बात मेरे बहुत बाद में समझ में आई थी कि व्यक्ति अपनी मान्यताओं को क्यों छोड़ना नहीं चाहता था l लेकिन अब धीरे-धीरे समझ में आने लग गया कि जिन मान्यता को हम मानते आ रहे हैं l वह मानताएं हमारी पहचान बन चुकी है और अब यदि वह मानता है टूटती हैं तुम्हारी पहचान यानी अस्तित्व पर ही खतरा उत्पन्न हो जाता है तो वह व्यक्ति फिर उन्हें छोड़ना नहीं चाहता l यह अहंकार का काम है l















