हम जिसे 'विकास' कह रहे हैं, वह प्रकृति का आत्मघाती विनाश है, क्योंकि सच्चा विकास आर्थिक…
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Sangita mote
हम जिसे 'विकास' कह रहे हैं, वह प्रकृति का आत्मघाती विनाश है, क्योंकि सच्चा विकास आर्थिक आंकड़ों (GDP) में नहीं, बल्कि मानव चेतना के आंतरिक सुधार में है।