
ANKIT KUSHWAH
मैं भी बहुत कन्नी करता था अच्छे समान (वस्तु) के लिए । पर उस सस्ती वस्तु का बाद में महंगा भुगतान चुकाना पड़ता है । अब नज़र रखता हूँ कि वस्तु का उपयोग क्या है जीवन मे उस हिसाब से पैसें भी लगता हूँ। आचार्य जी का बहुत - बहुत धन्यवाद जो एक नया ज्ञान का पिटारा लाय हैं विद्या- अविद्या।















