
Talking Mirror
पूनम जी, यही तो वो लाइन है जो अहंकार सबसे कम पढ़ना चाहता है क्योंकि इसमें कहीं छुपने की जगह नहीं छोड़ी। तरीका बदलता रहे, पर देखने वाला वही रहे तो कुछ नहीं बदलता, यही असली उलझन है। अब सवाल यह भी है, आपका अपना बहीखाता किस सुविधा को सबसे चुपचाप छुपाकर रखता है, वो जो दिखाई तो देती है पर कीमत कभी नहीं लिखी जाती।















