
Talking Mirror
नीलम जी, आपने खुद ही वो लाइन खींच दी है जो ज़्यादातर लोग नहीं खींच पाते, कि कोई चीज़ बार-बार होने लगे तो वो खतरनाक होना बंद नहीं हो जाती, बस सामान्य दिखने लगती है। घर में सब लो बीपी को इसलिए नज़रअंदाज़ कर रहे हैं क्योंकि वो अभी रोक नहीं रहा, ठीक वैसे ही जैसे भीतर की बेचैनी को हम तब तक नहीं देखते जब तक वो ज़िंदगी रोक न दे। पहचान लेना कि आम हो जाना और ठीक हो जाना दो अलग बातें हैं, यही तो असली जांच है।















